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डोनाल्ड ट्रम्प ने झांसा देकर अपने समर्थकों से करोड़ों रुपए का जुटाया चंदा

कंसास सिटी के 63 वर्षीय स्टेसी ब्लाट पिछले साल सिंतबर में कैंसर के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें पता लगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव अभियान में पैसे की कमी महसूस की जा रही है। उन्होंने, ऑनलाइन 500 डॉलर दे दिए। फिर उनकी जानकारी के बिना अक्टूबर तक उनके बैंक अकाउंट से हर सप्ताह 500 डॉलर निकलने लगे। ब्लाट ने सोचा कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। ऐसा नहीं था। दरअसल, यह ट्रम्प के चुनाव प्रचार के लिए एक कंपनी –विन रेड के माध्यम से ऑनलाइन डोनेशन हासिल करने की सोची-समझी योजना का हिस्सा था।

144 करोड़ रु. पर विवाद
कई डोनरों ने बताया कि वे केवल एक या दो बार पैसा देना चाहते थे लेकिन उनके खातों से बार-बार पैसा गया है। ट्रम्प के प्रवक्ता जेसन मिलर का कहना है कि विनरेड के जरिये 144 करोड़ रुपए के दो लाख लेनदेन विवादित रहे हैं।
ट्रम्प के चुनाव मैनेजरों ने ऑनलाइन दाताओं से चुनाव तक हर सप्ताह चंदा लेने के लिए योजना शुरू की थी। बहुत लोगों ने केवल एक या दो बार ऑनलाइन चंदा देने की सहमति जताई थी। लेकिन, बड़ी संख्या मेंं लोगों के खातों से कई सप्ताह तक पैसे निकाले गए। जल्द ही बैंकों, क्रेडिट कार्ड कंपनियों में धोखाधड़ी की शिकायतों का अंबार लग गया। कैलिफोर्निया के 78 वर्षीय विक्टर अमेलिनो ने सितंबर में विनरेड के माध्यम से ट्रम्प के लिए 990 डॉलर चंदा दिया था। उनके खाते से सात बार और इतनी ही रकम निकल गई।
2020 के अंत में ट्रम्प चुनाव अभियान समिति और रिपब्लिकन पार्टी ने ऑनलाइन डोनरों को 471 करोड़ रुपए लौटाए। दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी की जो बाइडेन समिति ने 41 करोड़ रुपए के ऑनलाइन रिफंड किए। बाइडेन का ऑनलाइन पैसा एक्टब्लू के खाते में गया था। अमेरिका में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी कानूनी सीमा से अधिक दान देने वाले लोगों सहित अन्य कारणों से प्रचार अभियान के लिए एकत्र पैसा लौटाते हैं। कई बैंकों और क्रेडिट कार्ड कंपनियों के अधिकारियों ने बताया कि उनके पास विनरेड के माध्यम से धोखाधड़ी की कई शिकायतें आई है। पैसा वापस मिलने पर मामले निपट जाते हैं।

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