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सीकर का 334 जन्मदिन आज, आज ही के दिन राव दौलत सिंह ने बसाया था सीकर को

सीकर आज अपनी स्थापना का 334वां वर्ष मना रहा है। कर्फ्यू के चलते शहर में कोई आयोजन तो नही हुआ, लेकिन लोग अगर इसे बसाने वाले और इसे विकास के पथ पर समयानुसार आगे बढ़ाने वाले को घर बैठे भी याद करेंगे तो उनके लिए यही सच्ची आस्था होगी। 
सीकर को बसाया था राव दौलतसिंह ने और नई उंचाईयां दी थी राव राजा कल्याण सिंह जी ने। आज हम आपको बताते है सीकर का इतिहास।  
इतिहासकार महावीर पुरोहित ने बताया कि सीकर की स्थापना सन् 1687 में राम नवमी के दिन राव दौलतसिंह जी ने की। 

सीकर की राजतंत्रीय शृंखला में अधिकृत शासक हुए राव दौलतसिंह को सिद्ध पुरूष शिवपुरी साधु के आशीर्वाद से पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जिसका नाम शिवसिंह रखा गया। इन्हीं राजा शिवसिंह ने सीकर के दुर्ग का निर्माण करवाया। सीकर से पहले इस जगह का नाम वीरभान का बास था।
शुक्ल पक्ष नवमी तिथि और चैत्र का मास।
दो लो सीकर थापियो वीर भान को बास।।

शिवसिंह से लेकर रावराजा कल्याण सिंह तक के शासकों में अन्तिम शासक रावराजा कल्याण सिंह सीधे, सरल एवं मानवयीय गुणों से भरपूर देव पुरूष हुए। 
उनमें धर्म और संस्कृति के प्रति गहरी आस्था थी। रावराजा कल्याण सिंह ने टीबी अस्पताल सांवली के लिए अपनी कोठी एवं जमीन, कल्याण अस्पताल का भवन, कॉलेज एवं स्कूल के लिए जमीनें आदि खुले हाथों से प्रदान की।  
    यहां के सुप्रसिद्ध औद्योगिक धरा से बजाज समूह के संस्थापक जमनलाल जी बजाज गांधीजी के पांचवें पुत्र थे। आजादी के आन्दोलन में उनकी प्रमुख भूमिका रही। 
यहां का श्रमिक वर्ग नौकरी की तलाश में बड़ी संख्या में आसाम, मुम्बई गया और यहां के लोगों का जीवनस्तर ऊंचा हुआ।
शिक्षा का प्रचार-प्रसार हुआ। बड़े शहरों में महाविद्यालयों की स्थापना प्रवासी दानदाताओं के सहयोग से हुई। उच्च शिक्षा प्राप्त कर यहां के लोग सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं में काफी ऊंचे पदों पर पहुंचे।
सीकर शहर एवं आसपास के गांव कस्बों में शिक्षण संस्थाओं का विकास विस्तार हुआ। नगर का विस्तार चारों दिशाओं में तीव्र गति से हुआ। 
 जयपुर बीकानेर के बीच सीकर होने से यह राजमार्ग से जुड़ गया। सीकर में चिकित्सा के उच्च तकनीकि साधनों के साथ मेडिकल कॉलेज की स्थापना भी हो गई है। 
वर्षभर तीज मेले, त्यौहार एवं धार्मिक आयोजनों के साथ सीकर अपनी संस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को सहेजे हुए है।
खाटूश्यामजी, सालासर, जीणमाता के प्रसिद्ध मेलों में प्रवासी लोग सपरिवार आकर यहां जात जडुले करते रहते हैं। 
प्रवासी लोग सीकर के विकास में बराबर रूचि लेते हैं एवं अपनी मातृभूमि की सेवा के हर संकल्प के साथ जुड़े रहते हैं। 
पुरे देश में सीकर का सांप्रदायिक सौहार्द एक मिसाल है।
देशभर में इस समय कोरोना वायरस का संकट है, लेकिन सीकर के लोग इस संकट में भी अपना दुख भुलाकर शासन और प्रशासन की व्यवस्थाओं में सहयोग कर आज कोरोना से लगातार लड़ाई लड़ रहे है। और इसी का नतीजा है कि यहां पर अभी तक कोरोना वायरस पर नियंत्रण पाया हुआ है। 
  चिकित्सा विभाग लगातार अपना काम बेहतरी से कर रहा है।  अगर सभी ने मिलकर के सरकार के जारी आदेशों का पालन किया और इस दुख की घड़ी में शासन प्रशासन का सहयोग किया तो यहां पर कोरोना जैसी कोई महामारी का बड़ा असर नहीं होगा। 
नमन है यहां की माटी को, सलाम है यहां के लोगों के जज्बे को।

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